दोस्ती

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दोस्ती

स्कुलमे अचानक भेट्ली किस्मतसे,
एकआपसमे बात कइली, हिम्मतसे ।
पहिलका दिन अजनबी रहली,
समय बितले गेलापर, दोस्त बन्ली ।।

संगे खेलली, संगे पढ़ली,
एक दोसरके हरदम मदत कइली ।
साथमे बिताएल दिन बडा अनमोल रहे,
काश ! उ दिन फेरसे लौटके आबे ।।

साथमे पढेके दिन छुट गेल,
दुरी भी बढ़ गेल, रास्ता भी बदल गेल ।
लेकिन दोस्तीके नाता कभी न टुटल,
मनमे पुरान यादसब सदाके लेल बसगेल ।।

सब अपन भविष्य बनाबेमे लागल हए,
सबके सफलताके कामना करइछी ।
आबेबाला दिनसब सुखी सम्पन्न रहे,
इहे बातके भगवानसे आस रखइछी ।।

जिन्दगी चाहे जहाँ लेजाए,
दोस्ती सब दिन अमर रहे ।
ई दोस्ती एतना मजबुत होजाए,
कि मृत्यु भी एकरा तोड़ न सके ।।

कविको परिचय

कविः बिवेक प्रसाद कुशवाहा
कविको फोटोः Download
ठेगानाः मलंगवा–२, सर्लाही, मधेश प्रदेश, नेपाल
भाषाः बज्जिका
फोनः +977 976 877 1655
ईमेलः words@bibekkushwaha.com.np

अस्विकरण (Disclaimer)

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