माई बाबुके योगदान आ लडकाके सफलता

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कविता

लड़काके जन्मसे माईबाबुके खुशी भेल मन,
हर कोनामे छागेल, उमंग आ आनन्दके तरंग ।
बचपनसे ही कन्धापर रखल गेल उम्मीदके बोझ,
“आबेवाला दिनमे लड़का पूरा करत” हए सबके सोंच ।।

माईबाबु अपन जरुरत नदेखके,
लड़काके जरुरत पहिले लागल देखे ।
ई सब बात लड़का जब समझगेल,
“पढेके परत, मेहनत करेके परत” सोंचके सुरु कएलक पढेके ।।

पढाई शुरु करते, लड़कासे आस बढगेल,
माईबाबुके सपनाके बिचमे, लड़काके सपना आगेल ।
एगोके मन सरकारी नौकरी, त दोसरके मन डाक्टर बनेके,
“अच्छा रस्ता चुनके” माईबाबुके सपना पूरा करेके ।।

समय अएलक एगो रस्तापर चलेके,
कोनो रस्तापर लड़का जाए, माईबाबुके साथ रहे मिलेके ।
अब कवनो हालमे पछाड़ी नहई देखेके,
सपना पुरा करके, कन्धापरसे उम्मीदके बोझ हई हटाबेके ।।

लड़काके सपना पूरा होलापर, माईबाबुके आँख भरगेल,
सङ्घर्षके दिन याद करके, खुशीके आँसु आगेल ।
माईबाबुके योगदानके सम्मान करके,
“अब हम कमाके देब” अहाँके अब सुखके जिन्दगी हई बिताबेके ।।

कविको परिचय

कविः बिवेक प्रसाद कुशवाहा
कविको फोटोः Download
ठेगानाः मलंगवा–२, सर्लाही, मधेश प्रदेश, नेपाल
भाषाः बज्जिका
फोनः +977 976 877 1655
ईमेलः words@bibekkushwaha.com.np

अस्विकरण (Disclaimer)

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