बदलैत मौसम के रंग
कविता कनकनी वाला जाढ़ अब भागे लागल, कोहराके मोट चादर अब फाटे लागल । सुतल धरती अब धीरे–धीरे आँख खोलत, नयाँ जीवनके रास्ता अब खुले लागत । …
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